Wed. Apr 24th, 2024

21 जुलाई, 2020
कोरोना काल में ज़रूरतमंदों को राहत लेकर आया राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए) कोविड-19 के दौर में गरीब लोगों के लिए बड़ा सहारा बनकर उभरा है। इस संकट के दौरान सरकार ने जहां गांव-गांव पहुंकर फंसे प्रवासी मजदूरों व कामगारों को मुफ्त में राशन उपलब्ध करवाया, वहीं समाज के कमजोर तबको को एनएफएसए किसी वरदान से कम नहीं। कुल्लू जिला की ही बात करें तो यहां 1.85 लाख लोगों को इस अधिनियम के अंतर्गत शामिल किया गया है। इन सभी लोगों को अप्रैल माह से लेकर नवम्बर, 2020 तक पांच किलोग्राम चावल व एक किलोग्राम चना मुफ्त प्रदान किया जा रहा है। अधिनियम के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए जिला स्तर पर सतर्कता समिति का गठन किया गया है जो हर महीने राशन वितरण की समीक्षा करती है।
अप्रैल से जून माह तक 1.85 लाख उपभोक्ताओं को 28020 क्ंिवटल चावल तथा 1389 क्ंिवटल काला चना मुफ्त आवंटित किया गया। सरकार ने कोरोना संकट के दृष्टिगत अगले पांच महीनों तक लगातार इन उपभोक्ताओं को मुफ्त में राशन प्रदान करने का निर्णय लिया है। अगले पांच महीनों के लिए 19700 क्विंटल चावल, 27220 क्ंिवटल गेहॅूं तथा 2315 क्विंटल काला चना आबंटित किया गया है।
एनएफएसए के तहत गर्भवती महिलाओं, स्तनपान करवाने वाली महिलाओं तथा छः माह से लेकर छः साल आयु के बच्चों को पोष्टिक आहार प्रदान करने का भी प्रावधान है। मिड-डे-मील के अंतर्गत 44874 बच्चों को 5245 क्ंिवटल चावल वितरित किए गए।
एनएफएसए के तहत क्या हैं योजनाएं
अधिनियम के तहत खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के माध्यम से योजनाओं का क्रियान्वयन किया जा रहा है। इनमें अन्तोदय अन्न योजना के तहत चयनित परिवारों को बीते जनवरी माह से 18.800 किलोग्राम गन्दम आटा प्रति राशन कार्ड 3.20 रुपये की दर से तथा 15 किलोग्राम चावल तीन रुपये की दर से उपलब्ध करवाया जा रहा है। प्राथमिक गृहस्थियांे को 2.800 किलोग्राम गंदम आटा तथा दो किलो चावल उक्त दर से प्रदान किए जा रहे हैं। एक से छः व्यक्तियों के परिवारों को 35 किलोग्राम खाद्यान्न पूरा करने के लिए सात रुपये की दर से गंदम आटा तथा 6.85 रुपये की दर से चावल उपलब्ध करवाए जा रहे हैं।
क्या कहना है समिति की अध्यक्ष का
उपायुक्त एवं जिला सतर्कता समिति की अध्यक्ष डाॅ. ऋचा वर्मा का कहना है कि एनएफएसए के अंतर्गत उपलब्ध करवाए जाने वाले राशन की गुणवत्ता पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। कार्यान्वित की जा रही विभिन्न खाद्य योजनाओं में वितरित किए जा रहे खाद्यान्नों के निर्धारित मात्रा में नहीं मिलने अथवा निम्न गुणवत्ता के खाद्यान्न मिलने से संबंधित कोई भी शिकायत समिति को की जा सकती है। इसपर तुरंत से संज्ञान लिया जाता है। समय-समय पर खाद्यान्नों की गुणवत्ता की जांच करवाई जा रही है। जिला के अलावा, ग्राम पंचायत स्तर पर, शहरी निकायों तथा विकास खण्ड स्तर पर भी सतर्कता समितियों का गठन किया गया है