Fri. Apr 12th, 2024
ज़िला दंडाधिकारी मुकेश  रेपसवाल ने लोकसभा  निर्वाचन-2024  को लेकर
दंड प्रक्रिया संहिता  1973 की धारा 144 के तहत  आदेश जारी किए हैं।
जारी आदेश  के अनुसार ज़िला में आग्नेयास्त्र, विस्फोटक और घातक हथियार नहीं  लाने और सार्वजनिक स्थानों में इनके उपयोग या प्रदर्शन को पूर्णतया प्रतिबंधित किया गया है।
किसी भी व्यक्ति को संबंधित एसडीएम या उपमंडल मजिस्ट्रेट, सहायक रिटर्निंग अधिकारी की पूर्वानुमति के बिना  सार्वजनिक स्थल में धरना, जलुस, लाउडस्पीकर का इस्तेमाल, राजनीतिक भाषण आदि  की अनुमति नहीं होगी।
सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने  वाले अथवा  जाति, धर्म या समुदाय के नाम पर नफरत फैलाने  वाले भाषण , पैम्फलेट, पोस्टर, रेडियो, इंटरनेट या सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म या किसी अन्य इलेक्ट्रॉनिक और भौतिक साधन का उपयोग  को भी पूर्ण रूप से प्रतिबंधित किया गया है।
जारी आदेश में यह भी कहा गया है कि कोई भी व्यक्ति किसी के समर्थन या विरोध में सार्वजनिक स्थानों पर किसी भी प्रकार की दीवार लेखन का नहीं करेगा या हिमाचल प्रदेश खुला स्थान (विरूपण निवारण) अधिनियम, 1985 के आदेशानुसार सार्वजनिक स्थानों को किसी भी प्रकार से विकृत नहीं करेगा।
इसके साथ निजी संपत्ति के मामले में  प्रचार सामग्री प्रयोग करने से पहले संपत्ति मालिक की लिखित अनुमति  अनिवार्य रहेगी।
राजनीतिक दलों या चुनाव लड़ने वाले  उम्मीदवारों द्वारा संबंधित सहायक रिटर्निंग अधिकारी की लिखित अनुमति के बिना चुनाव प्रचार के लिए किसी भी वाहन का उपयोग नहीं किया जा  सकेगा। साथ में सक्षम प्राधिकारी की लिखित अनुमति के बिना ध्वनि प्रसारण   उपकरणों  युक्त वाहनों के प्रयोग पर भी  पाबंदी रहेगी।
चुनाव प्रचार के दौरान धार्मिक स्थलों का उपयोग चुनावी उद्देश्यों के लिए प्रतिबंधित रहेगा।
इसी तरह से मतदान केंद्र पर कोई भी व्यक्ति पहचान पर्ची के रूप में पोस्टर, झंडे, चुनाव चिह्न या किसी अन्य विज्ञापन सामग्री का प्रदर्शन या उपयोग नहीं  कर सकेगा।
ज़िला दंडाधिकारी द्वारा जारी आदेश में यह  स्पष्ट किया गया है कि  निर्वाचन प्रक्रिया को शांतिपूर्वक, निष्पक्ष तथा संगठित तरीके से संपन्न करवाने के लिए असामाजिक, अवांछनीय और विघटनकारी तत्वों को नियंत्रित करने तथा कानून व्यवस्था और सार्वजनिक शांति बनाए रखने के लिए प्रतिबंधात्मक उपाय लागू करना आवश्यक है।
आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गए हैं और 4 जून, 2024 तक  प्रभावी रहेंगे।
आदेश का उल्लंघन भारतीय दंड संहिता की धारा 188 के तहत दंडनीय होगा।