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मंडी, 25 फरवरी : मंडी जिला में केंद्रीय वस्त्र मंत्रालय की परंपरा योजना के तहत हस्तशिल्प कारीगरों के कौशल विकास एवं प्रोत्साहन के लिए कार्य किया जा रहा है। योजना के तहत मंडी जिला के 223 हस्तशिल्प कारीगरों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। जिला उद्योग केंद्र मंडी के महा प्रबंधक ओम प्रकाश जरयाल ने इस बारे जानकारी देते हुए बताया कि परंपरा योजना के अंतर्गत कार्यशालाएं आयोजित कर विभिन्न हस्तशिल्प गतिविधियों से जुडे़ कारीगरों को हस्तशिल्प तकनीकी प्रशिक्षण व डिजाईन व तकनीकी विकास को लेकर प्रशिक्षित किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि कारीगरों के कुल्लू शॉल , धातु व काष्ठ शिल्प, रेशम बुनाई इत्यादि कार्यों के प्रशिक्षण पर बल दिया जा रहा है। कुल्लू शॉल का तकनीकी प्रशिक्षण मंडी जिला के शिवाबदार, सैंज तथा कटारू तथा धातु शिल्प का सोझा गांव में चल रहा है । हटौण गांव में डिजाईन व तकनीकी विकास की कार्यशाला चल रही है।
महाप्रबंधक ने बताया कि हाल ही में उन्होंने जंजैहली में कुल्ल शॉल और काष्ठ शिल्प के तकनीकी प्रशिक्षण केंद्रों का निरीक्षण कर योजना के बारे में प्रशिक्षणार्थियों से पारस्परिक विचार विमर्श भी किया। इस दौरान एसडीएम थुनाग पारस अग्रवाल ने प्रशिक्षणार्थियों से चर्चा की।
प्रशिक्षण प्राप्त करने के लिए मिलेगा मानदेय
ओपी जरयाल ने बताया कि हस्तशिल्प तकनीकी प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले कारीगरों को 300 रुपये प्रतिदिन की दर से तथा मास्टर शिल्पकार को 15 हजार रुपये मासिक और डिजाईनर को 55 हजार रुपये मासिक की दर से प्रशिक्षण मानदेय प्रदान किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि प्रदेश में योजना के कार्यन्वयन हेतु बेस लाईन सर्वे तथा हस्ताशिल्प कारीगरों के डैटा कलैक्शन का कार्य पूर्ण हो चुका है । प्रत्येक प्रशिक्षण केंद्र में दो मास्टर शिल्पकार तकनीकी प्रशिक्षण दे रहे हैं ।