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मंडी, 21 सितंबर। प्रदेश सरकार के निर्देशानुसार मंडी जिला प्रशासन ने जिले में पंजीकृत देवी-देवताओं के मूल स्थानों/मंदिरों के साथ लगती सरकारी/वन भूमि से 10-10 बिस्वा भूमि मांग के अनुरूप देवी-देवता के नाम करने के मामलों में एक सुस्पष्ट मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) का निर्धारण करने के लिए सर्व देवता समिति मंडी के साथ बैठक की। बैठक में व्यापक विचार विमर्श के उपरांत भूमि हस्तांतरण के प्रस्तावों एवं मामलों में समिति की सहमति से आवेदन से स्वीकृति तक की संपूर्ण प्रक्रिया को लेकर एसओपी तय की गई।
इसके अलावा बैठक में प्रशासन को अब तक प्राप्त ऐसे विभिन्न प्रस्तावों पर विस्तार से चर्चा की गई।
डीसी अरिंदम चौधरी ने उपमंडलवार प्राप्त मामलों पर विस्तार से चर्चा की और वस्तुस्थिति का ब्यौरा लिया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने जिले में मांग के अनुरूप देवी देवताओं के मूल स्थानों/मंदिरों के साथ लगती सरकारी/वन भूमि से 10-10 बिस्वा भूमि देवी-देवता के नाम करने को लेकर एक सुस्पष्ट मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) निर्धारण के निर्देश दिए हैं। इस संदर्भ में सर्व देवता समिति के साथ चर्चा की गई ताकि किसी प्रकार की अस्पष्टता न रहे। ऐसे मामलों में आवेदन से लेकर स्वीकृति तक की संपूर्ण प्रक्रिया के लिए एसओपी तय की गई है।
उन्होंने आग्रह किया कि भूमि के लिए आवेदन करते समय यह ध्यान में रखें कि मंदिर के साथ लगती जमीन रिक्त भूमि हो और वहां पर पहले से कोई निर्माण न हुआ हो। उन्होंने कहा कि वन भूमि से जुड़े मामलों में एफआरए स्वीकृति के केस बना कर प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
बता दें, मंडी शिवरात्रि को लेकर 216 देवी देवता पंजीकृत हैं। वहीं, सुंदरनगर शिवरात्रि में 65 देवी देवता पंजीकृत हैं। वहीं, प्रशासन को नए पंजीकरण के लिए भी आवेदन प्राप्त होते रहते हैं।
बैठक में सर्व देवता समिति के अध्यक्ष शिव पाल शर्मा और अन्य समिति सदस्यों ने अपने बहुमूल्य सुझाव दिए।
एडीएम डॉ. मदन कुमार ने बैठक की कार्यवाही का संचालन किया। इस दौरान सर्व देवता समिति के प्रतिनिधियों के अलावा संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।