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मलाना अग्निकांड प्रभावितों की हर संभव सहायता करेगा प्रशासन- आशुतोष गर्ग

मलाणा के 58 प्रभावित परिवारों को वितरित की गई
12  लाख रूपये     की आर्थिक सहायता ।
कुल्लू 3 नवंबर। जिलाधीश आशुतोष गर्ग ने कहा कि बीते दिनों ऐतिहासिक गांव मलाणा में अग्निकांड के घटना दुखद थी। इसमें अनेक परिवार बेघर हो गए। हालांकि जिला प्रशासन ने सभी प्रभावित परिवारों को नियमानुसार फौरी राहत प्रदान की। प्रभावितों के स्थाई पुनर्वास की व्यवस्था भी करी गई लेकिन अग्निकांड में संपत्ति के अलावा भावनात्मक तौर पर जोक लोगों का नुकसान हुआ है उसकी भरपाई नहीं की जा सकती।
आशुतोष गर्ग ने कहा कि जिला प्रशासन प्रभावित परिवारों को हर संभव सहायता प्रदान करने के लिए संजीदगी के साथ काम कर रहा है। आज जिला रेडक्रॉस सोसायटी की ओर से प्रत्येक प्रभावित परिवार को ₹20000 की सहायता राशि प्रदान की गई। उन्होंने कहा कि राशि का वितरण  एसडीएम विकास शुक्ला के माध्यम से करवाया गया। उल्लेखनीय है कि कुछ रोज पहले जिलाधीश ने समाज के संभ्रांत वर्ग तथा आम जनमानस से मलाणा के प्रभावित परिवारों की मदद के लिए जिला रेडक्रॉस में अंशदान करने की अपील करी थी। उन्होंने बताया कि समाज के बहुत से लोग इस पुनीत कार्य के लिए आगे आएं और लोगों ने अंशदान भी किया जिसमे हिमालयन हाईडल ऐनर्जी प्रा. लि. ने 50 हजार हिमालयन बुद्धिष्ठ कल्चरल सोसाईटी ने 15 हजार ,यमुना, पुष्पा , राजपाल ने 1 हजार रूपये प्रत्येक व मनोहर, दिशा, अंकुश, कमलकान्त ,कुलदीप प्रत्येक ने 500 रूपये का अंशदान दिया । उन्होंने कहा कि लोगों का थोड़ा-थोड़ा अंशदान पीड़ित मानवता जरूरतमंद लोगों के लिए बहुत बड़ा मददगार बनकर सामने आया है। उन्होंने समाज से पुनः अपील की है कि रेड क्रॉस में पीड़ित मानवता की सहायता के लिए कुछ ना कुछ अंशदान अवश्य करें। इससे किसी बीमार व्यक्ति को उपचार सुविधा मिल सकती है और व्यक्ति की जान बचाई जा सकती है।
आशुतोष गर्ग ने कहा कि आगजनी की घटनाओं को रोकने के लिए समाज के प्रत्येक व्यक्ति को संवेदनशीलता के साथ अपना योगदान करना चाहिए। उन्होंने कहा की आगजनी की अधिकांश घटनाएं बिजली के शॉर्ट सर्किट अथवा एलपीजी गैस सिलेंडर या फिर बीड़ी सिगरेट का सेवन करने वालों की वजह से घटती है। उन्होंने लोगों से अपील की कि अपने घरों के आसपास बालन लकड़ी को अथवा मवेशियों के लिए घास इत्यादि को सुरक्षित स्थान पर भंडारण करें। ऐसा करने से आगजनी की घटनाओं को रोका जा सकता है और यदि छुटपुट घटना होती भी है तो उस पर काबू पाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि विशेषकर सर्दियों के दौरान घास व लकड़ी का भंडारण किसी सुरक्षित स्थान पर करने का प्रयास किया जाना चाहिए।